चिन्ता - मुक्त जीवन
द्वारा
श्री श्री परमहंस योगानंद
अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के एंसिनिटास स्थित प्रथम self-realization फेलोशिप मंदिर में दिया गया एक प्रवचन 12 मई 1940
चिंता चेतना की एक मनोवैज्ञानिक अवस्था है जिसमें आप किसी ऐसी समस्या के संदर्भ में अ सहायता एवं व्याकुलता की भावनाओं में जकड़े जाते हैं जिसे सुलझा ने का कोई रास्ता आपको नजर नहीं आता। आप शायद अपने बच्चे के विषय में या अपने स्वास्थ्य के विषय में या किसी रेड के भुगतान के विषय में गंभीरता से सोच रहे हैं जब इसका शीघ्र कोई समाधान दृष्टि पत्र में नहीं आता तो आप उस परिस्थिति के विषय में चिंता करने लगते हैं और इससे आपको क्या मिलता है सर दर्द अशांति हृदय विकार क्योंकि आप स्वयं अपना ही या अपनी समस्याओं का विश्लेषण नहीं करते इसलिए आप नहीं समझ पाते कि अपनी भावनाओं को या सामने खड़ी समस्या को कैसे नियंत्रित करें चिंता करने में समय व्यर्थ गंवाने के बजाय समस्या के कारण को कैसे हटाया जाए इस पर सकारात्मक चिंतन कीजिए यदि आपको किसी समस्या से मुक्त होना है तो शांति से अपनी कठिनाई का विश्लेषण कीजिए परिस्थिति के पक्षा पक्ष का विचार कर शुरू से अंत तक 11 मुद्दे को लिखिए फिर सारे मुद्दों को देखते हुए लक्ष्य को पाने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं इसे सारा सार विचार कर निश्चित कीजिए।
आपके पास यदि पैसा ना हो तो आप प्रत्यक्ष अनुभव करते हैं सारा संसार जैसे पीछे हटता नजर आता है परंतु चिंता इसका कोई समाधान प्रस्तुत नहीं कर सकती मन को चुस्त कीजिए और दृढ़ता से मन में यह द्वारा यह मैं अपना हिस्सा पाने के लिए दुनिया को हिला कर रख दूंगा। मुझे शांत रखने के लिए संसार को मेरी आवश्यकता की पूर्ति करनी ही होगी जिस किसी ने भी कुछ भी काम किया हो चाहे वह घास पात उखाड़ना ही क्यों ना हो उसने इस पृथ्वी पर कुछ ना कुछ उपयुक्त काम किया ही है तो फिर उसे इस पृथ्वी के उपहारों में अपना न्याय सम्मत हिस्सा क्यों न मिले किसी को भी भूखा रहने की या वंचित रह जाने की आवश्यकता नहीं है।
पैसे का मह समाप्त हो जाएगा यह मैं जो कह रहा हूं इसे याद रखिए पैसा सत्ता की लालसा पैदा करता है और किराया व अपने स्वामी को दूसरों के दुखों के प्रति हृदय सुन बना देता है धन संग्रह ठीक है यदि उसी धनवान के मन में दूसरों की आवश्यकता अनुसार सहायता करने की इच्छा हो निस्वार्थ लोगों के पास पैसा रहना एक वरदान है परंतु स्वार्थी लोगों के पास उसका होना एक अभिशाप है मैं फिलाडेल्फिया अमेरिका के एक आदमी को जानता था जिसके पास 1 करोड डॉलर की संपत्ति थी परंतु वह संपत्ति ने उसे कभी भी कोई सुख नहीं दिया केवल दुख ही दुख दिए वह किसी को कभी 10 सेंट मूल्य की कॉपी भी नहीं पिलाता था सोना हमें उपयोग करने के लिए दिया गया है परंतु वह ईश्वर के सिवा और किसी का नहीं है ईश्वर की प्रत्येक संतान को ईश्वर के सोने का उपयोग करने का अधिकार है आपको अपनी विफलता को स्वीकार कर अपना अधिकार नहीं छोड़ देना चाहिए।
सफलता या विफलता आपके अपने मन में ही तय की जाती है
ईश्वर ने आपको अपना पुत्र बनाया आपने अपने आप को भिखारी बना लिया यदि आपने अपने मन में यह स्वीकार कर लिया है कि आप एक असहाय दुर्लभ जीव हैं और आप सबको है बात अपने मन पर अंकित करने देते हैं कि आप को रोजगार नहीं मिल सकता तो आपने अपने ही मन में स्वयं अपने विरुद्ध निर्णय दे दिया है कि आपके लिए कोई आशा नहीं है भगवान या भाग का कोई निर्णय नहीं बल्कि आपका अपना निर्णय आपको दरिद्र और चिंतित बनाकर रखता है सफलता या विफलता आपके मन में ही तय की जाती है सारा समाज भी कहता हूं कि आपको काम नहीं मिल सकता और यदि आप खुश ईश्वर प्रदत्त इच्छाशक्ति के साथ इस दृढ़ निश्चय को बनाए रखें कि आपको कठिनाइयों में यातना भोगने के लिए छोड़ नहीं दिया जा सकता तो आप एक गुड दिव्य शक्ति को अपने में जागते हुए पाएंगे और आप देखेंगे कि उस दृढ़ निश्चय की की आकर्षण कारी शक्तियां आपके लिए नए रास्ते खोल देंगे अपने वर्तमान अवस्था का दुख मत कीजिए और चिंता करना छोड़ दीजिए यदि अब आपने चिंता करना छोड़ दिया और उचित प्रयास किया तो आप शांत रहेंगे और अपने लक्ष्य पर पहुंचने का कोई ना कोई रास्ता ढूंढ ही लेंगे।
इस बात को सदा याद रखिए कि प्रत्येक बार जब आप चिंता करते हैं तब आप मानसिक ब्रेक लगा देते हैं और उस ब्रेक की प्रतिरोधक शक्ति के विरुद्ध संघर्ष करने में आप अपने हृदय एवं मस्तिष्क पर दबाव डालते हैं। आप अपनी कार ब्रेक लगाकर चलाने का प्रयास नहीं करते क्योंकि आप जानते हैं कि इससे कार की अंतरावली को गंभीर हम पहुंचेगी चिंता आपके प्रयास रूपी पहियों पर लगा हुआ ब्रेक है वह आपको आगे सरकने नहीं देती यदि आप किसी बात को असंभव ना माने तो कुछ भी असंभव नहीं चिंता यह बात आपके मन में उतार सकती है कि आप जो करना चाहते हैं वह संभव है या असम्भव है।
चिंता में समय और शक्ति का अपव्यय मातृभाषा है इसके बजाय अपने मन को कुछ ठोस प्रयास करने में लगाइए आलसी मनुष्य से तो प्रयास करके कुछ प्राप्त करने वाला भौतिकवादी मनुष्य बेहतर है आलसी को मानव और भगवान दोनों ही त्याग देते हैं उद्यमी लोगों ने समृद्धि प्राप्त की है परंतु पैसे को अपनी सफलता का मापदंड मत बनाइए राया पैसा नहीं बल्कि उस पैसे को कमाने में जिस सृजनात्मक क्षमता का उपयोग किया गया वह क्षमता संतोष प्रदान करती है चिंताओं से भागना मूर्खता है क्योंकि आप जहां भी जाएंगे वही आपकी चिंताएं आपके साथ जाएंगे आपको अपनी समस्याओं का सामना निर्भयता से और अपने अंतःकरण को साफ रखते हुए करना सीखना चाहिए जैसे मैंने किया अब मैं अपने शरीर और आत्मा के लिए कोई प्रार्थना नहीं करता क्योंकि मैंने भगवान से सारस्वत आश्वासन प्राप्त कर लिया है यह पर्याप्त मेरे लिए प्रार्थना करने का अर्थ होगा संदेह करना मेरा अंतरण साफ है क्योंकि मैंने किसी का कभी कुछ बुरा नहीं किया मैं जानता हूं कि यह सब तरह मैंने किसी का कभी कुछ बुरा नहीं किया कह पाने का अर्थ है पृथ्वी पर सबसे सुखी व्यक्ति होना।
जब मैं उन सब लोगों के बारे में सोचता हूं जिनकी मुझ में निष्ठा है भावनात्मक अंदर तो के कारण नहीं बल्कि बुद्धि और विवेक के कारण तो मैं अपने को धन्य मानता हूं सभी चीजों में मुझे सच्ची मित्रता सबसे अधिक प्रिय है सबके मित्र बने आपके प्रेम और विश्वास को कुछ लोग छोड़ भी दें तो भी हताश ना हो अपने आदर्शों पर चलते रहिए आप जो है वही हैं यह जीने का एक मात्र सत्य निष्ठा तरीका है सब आपके मित्र नहीं भी बनना चाहे तो भी आपको बदले मैं किसी प्राप्ति की कोई आशा किए बिना सब के प्रति मित्रता पूर्ण व्यवहार करना चाहिए मैं सबका हमदर्द हूं और उन से प्रेम करता हूं परंतु दूसरे किसी से यह अपेक्षा कभी नहीं रखता कि वह मेरा मित्र बने और मेरा हमदर्द बने इस तथ्य के आधार पर मैं अपने आप से और सारे संसार से मैत्रीपूर्ण शांति में रक्त हूं और मेरे लिए कभी चिंता का कोई कारण नहीं होता।
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