Monday, August 1, 2022

ग्रहण करने योग्य शिक्षा

 ग्रहण करने योग्य शिक्षा

वह शिक्षा जिसे ग्रहण करने के लिए हम पृथ्वी पर आए हैं




         आपकी सभी निधियों में मैत्री की निधि सबसे मूल्यवान है क्योंकि वह आपके साथ इस जीवन के परे भी जाएगी। आप अपने जितने सच्चे मित्र बनाएं हैं। उन सब से आप मृत्यु का द्वार पार करने के बाद फिर से मिलेंगे क्योंकि सच्चा प्रेम कभी व्यर्थ नहीं जाता दूसरी ओर गिड़ा भी कभी व्यर्थ नहीं जाती आज जब भी आप किसी से गिला करते हैं तब आप उसे अपनी और बार-बार आकर्षित करते हैं जब तक आप उस गढ़ा से मुक्त ना हो जाएं।
       प्रेम यदि पवित्र ना हो तो वह थोड़े समय में ही समाप्त हो जाता है। उन सब प्रेमियों का क्या हुआ जिन्होंने चंद्रमा के शीतल प्रकाश में एक दूसरे का अनंत काल तक साथ देने का वादा व कसमें खाई थी? उनके  कपाल सारी पृथ्वी पर इधर-उधर बिखरे पड़े हैं और चंद्रमा उनमें से अधिकांश के ऊपर हंसता है और कहता है "कैसी बड़ी-बड़ी बातें करते थे यह लोग उनका प्रेम तो अनंत काल तक नहीं रह सका"। परंतु आप जो प्रेम अपने हृदय में अनुभव करते हैं यदि इस संसार का नहीं है संसार एक नहीं है आपने यदि सबके लिए प्रेम पवित्र मित्रता के आधार पर प्राप्त किया है शरीर के आधार पर नहीं आ फिर दूसरों से प्रेम केवल उनकी खातिर करते हैं किसी स्वार्थ लाभ के लिए नहीं तो आपने ईश्वर यद्यपि प्रेम प्राप्त कर लिया है और उसी को आप व्यक्त कर रहे हैं। पति-पत्नी के बीच मायबाप और बच्चे के बीच मित्र मित्र के बीच अपने और अन्य सबके बीच पवित्र प्रेम को विकसित करने की शिक्षा ग्रहण करने के लिए हम सभी पृथ्वी पर आए हैं।

द्वारा श्री श्री परमहंस योगानंद

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